राज्य आंदोलनकारियों द्वारा कानून व्यवस्था और बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर बैठक की गई

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देहरादून: 
प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर देहरादून स्थित शहीद स्मारक में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सुलोचना भट्ट ने की, जबकि संचालन प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने किया।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, संयुक्त नागरिक संगठन के दिनेश भण्डारी तथा शिवराज सिंह रावत ने प्रदेश में बढ़ रही हत्या, गोलीकांड और आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार अपराधों में वृद्धि हुई है, उससे प्रदेश की जनता भयभीत और आक्रोशित है। उनका आरोप था कि “लगभग हर तीसरे दिन हत्या की घटना सामने आ रही है, जो देवभूमि उत्तराखंड की छवि के विपरीत है।”

प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, युद्धवीर सिंह चौहान और ताराचंद गुप्ता ने कहा कि इस राज्य के निर्माण के लिए 42 आंदोलनकारियों ने शहादत दी थी। त्याग, तपस्या और बलिदान से बने इस राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून को आज “क्राइम कैपिटल” कहकर पुकारा जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि प्रदेश में बढ़ती गुंडागर्दी, भू-माफियाओं की सक्रियता और लगातार हो रहे गोलीकांड से आमजन में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, जबकि मंत्री और विधायक चुप्पी साधे हुए हैं। विपक्ष की ओर से भी ठोस प्रतिक्रिया न आने पर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के प्रति जनाक्रोश बढ़ रहा है।

आंदोलनकारी मंच ने मुख्यमंत्री से मांग की कि अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। सचिव स्तर के अधिकारियों को जिलों और कस्बों में जाकर जनता से सीधे संवाद कर फीडबैक लेना चाहिए। लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, अन्यथा आंदोलनकारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

बैठक में सत्यापन अभियान को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सत्यापन के नाम पर केवल गरीब तबके पर कार्रवाई की जा रही है और चालान कर औपचारिकता पूरी की जा रही है। अन्य राज्यों से आए व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की गंभीर जांच नहीं की जा रही। साथ ही, फ्लैट, पॉश इलाकों, नई एजेंसियों और विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की जांच में भी लापरवाही बरती जा रही है।

द्वारिका बिष्ट, सुलोचना भट्ट और तारा पांडे ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने ऐसे उत्तराखंड के लिए संघर्ष नहीं किया था, जहां चोरी, लूट, हत्या और भू-माफियाओं का बोलबाला हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की पीसीआर गाड़ियां पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं और जो हैं भी, वे सक्रिय रूप से कार्य नहीं कर रहीं।

बैठक में मुख्य रूप से केशव उनियाल, तारा चंद गुप्ता, जगमोहन सिंह नेगी, जितेंद्र अन्थवाल, शिवराज सिंह रावत, अवधेश शर्मा, दिनेश भण्डारी, बिशम्बर दत्त बौंठीयाल, गणेश डंगवाल, युद्धवीर सिंह चौहान, हरी सिंह मेहर, मनोज नौटियाल, प्रदीप कुकरेती, सत्या कंडवाल, वीरेंद्र सिंह रावत, सुरेश नेगी, पुष्पलता सिलमाणा, अरुणा थपलियाल, राजेश्वरी नेगी, तारा पांडे, साबी नेगी, विमला रावत, हरीश पंत, गिरीश चंद भट्ट, सरोज कंडवाल, शांति कैन्तुरा, हरिओम ओमी और सतेन्द्र नौगांई सहित अनेक राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

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