देहरादून:
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर उत्तराखंड में शीतकाल की पहली बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया और लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में प्रदूषण, धूल और शुष्क मौसम से लोग परेशान थे, ऐसे में इस बारिश ने राहत पहुंचाई है। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से ठंडक बढ़ी है, वहीं पर्यावरण को भी लाभ मिला है। वही चारो धामों में भी भारी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इस बारिश को किसानों, पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए भी शुभ संकेत माना जा रहा है।
प्रदेश में पिछले कई महीनों से वर्षा के अभाव के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही थीं, जिससे जंगलों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा था। ऐसे में शीतकाल की इस पहली बारिश को वनाग्नि के खतरे को कम करने के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। बारिश से जंगलों में नमी बढ़ेगी, जिससे आग लगने की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी।

वहीं, पहाड़ो की रानी मसूरी में भी भी भारी बर्फबारी देखने को मिली पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी से मौसम सुहावना हो गया है। औली, मसूरी, धनोल्टी, चोपता जैसे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी की खबर से पर्यटकों में उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे पर्यटकों के लिए यह मौसम खास बन गया है। आने वाले दिनों में प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बारिश और बर्फबारी का सीधा असर पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों पर भी पड़ेगा। होटल, होमस्टे, टैक्सी, गाइड और अन्य पर्यटन से जुड़े लोगों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड में हुई शीतकाल की पहली बारिश और बर्फबारी ने न केवल मौसम को सुहावना बनाया है, बल्कि पर्यावरण, वन संरक्षण और पर्यटन व्यवसाय के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं।
