देहरादून/नई दिल्ली:
विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व उत्तराखंड ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंडोनेशिया और नेपाल के साथ शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित इंडोनेशिया और नेपाल के दूतावासों में दोनों देशों के कार्यवाहक राजदूतों से शिष्टाचार भेंट कर संस्कृत अध्ययन, संयुक्त अनुसंधान, शिक्षक-छात्र आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने उत्तराखंड सरकार द्वारा संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिए जाने, प्रदेश के सभी 13 जनपदों में संस्कृत ग्रामों की स्थापना और संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड संस्कृत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
बैठकों में इंडोनेशिया और नेपाल के प्रतिनिधियों ने भी संस्कृत संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तराखंड की पहल की सराहना की। इंडोनेशिया के साथ उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का प्रस्ताव रखा गया, जबकि नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त शोध, शैक्षणिक आदान-प्रदान और संस्कृत अध्ययन को नई गति देने पर सहमति बनी। सचिव दीपक कुमार ने कहा कि संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय से भाषा को युवाओं के बीच अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में संगोष्ठियों, व्याख्यानों, कार्यशालाओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत की शाश्वत प्रासंगिकता को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा।
