कांग्रेस के मंच से ‘गायब’ हरीश रावत, 2027 से पहले बढ़ी सियासी हलचल; क्या बदल रही है उत्तराखंड की राजनीति ?
उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की भूमिका को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के दो बड़े कार्यक्रमों में उनकी गैरमौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। 17 जुलाई 2026 को देहरादून में राहुल गांधी के युवा संवाद से लेकर हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली तक, पार्टी के बड़े मंचों पर हरीश रावत नजर नहीं आए। अब सियासी गलियारों में सवाल तैर रहा है कि यह महज संयोग है या फिर कांग्रेस के भीतर बदलते समीकरणों का संकेत? कभी उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में ‘हरीश रावत फैक्टर’ का खूब जिक्र होता था, लेकिन अब बड़े कार्यक्रमों के मंच पर उनकी गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि पिछले कुछ समय से हरीश रावत के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ राजनीतिक समीकरणों और उनकी तारीफों को लेकर भी चर्चा होती रही है। ऐसे में कांग्रेस के मंच से दूरी और सत्ता पक्ष के मुख्यमंत्री के प्रति नरम तेवर—इन दोनों को जोड़कर सियासी पंडित अपने-अपने गणित लगाने में जुटे हैं। हालांकि, सिर्फ मंच पर मौजूदगी या गैरमौजूदगी के आधार पर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का चुनावी रण जैसे-जैसे करीब आएगा, वैसे-वैसे पुराने दिग्गजों की चाल, कांग्रेस की रणनीति और हरीश रावत की अगली राजनीतिक करवट पर निगाहें जरूर टिकी रहेंगी। आखिर राजनीति में कब कौन सा ‘रावत’ किस तरफ करवट ले ले, यह पहाड़ की सियासत में पहले भी कई बार देखने को मिला है।
