नई दिल्ली:
अमेरिका की नई व्यापार नीति ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे, लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ नई व्यापार जांच शुरू करने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला Donald Trump के नेतृत्व वाले प्रशासन की ओर से लिया गया है, जिससे भारत सहित कई बड़े व्यापारिक साझेदारों को बड़ा झटका लग सकता है।
अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जांच 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत शुरू की जा रही है। इस प्रावधान के तहत अमेरिका को यह अधिकार मिलता है कि यदि किसी देश की व्यापार नीतियां अमेरिकी उद्योगों या कंपनियों के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं तो उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई की जा सकती है। इसी कानून का उपयोग पहले भी कई बार किया जा चुका है, खासकर चीन के साथ व्यापारिक विवाद के दौरान।
इस जांच की जद में आने वाले देशों की सूची में भारत के अलावा China, Mexico, European Union, Japan और Taiwan जैसे प्रमुख आर्थिक साझेदार भी शामिल हैं। इन देशों से अमेरिका में आने वाले उत्पादों और सेवाओं की व्यापक समीक्षा की जाएगी। जांच के बाद अमेरिका इन देशों से आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार यह कार्रवाई कई रूपों में सामने आ सकती है। इसमें आयात शुल्क बढ़ाना, सेवाओं पर अतिरिक्त फीस लगाना या फिर अन्य प्रतिबंधात्मक कदम शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योगों और रोजगार की सुरक्षा के लिए उठाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन नई जांच की घोषणा ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।
यदि अमेरिका भारत से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है तो इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर आईटी सेवाओं, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों के क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी इस कदम को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। कई देशों ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका की ओर से एकतरफा टैरिफ लगाए जाते हैं तो वे भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस जांच के नतीजे क्या निकलते हैं और इसका भारत सहित अन्य देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर क्या असर पड़ता है।
