ऋषिकेश :
उत्तराखंड राज्य में वन छेत्र से लगे हुए कई गांव है जहां की जीविका और आधार वन छेत्र पर आधारित होता था, लेकिन कुछ समय से जंगली जानवरों ने यहां की कृषि को बर्बाद कर दिया और रोजगार की तलाश शहरों की ओर ले आई जिसका नतीजा आज गांव के गांव खाली हो गए है, आज सबसे बड़ा चैलेंज इन गांवों में वापस रिवर्स पलायन को करना है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की मधु ग्राम की कल्पना सबसे बड़ा रोल निभा सकती है, जिस से घर बैठे रोजगार मिल सकता है,ये कहना है मौन परिषद उत्तराखंड के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल का।
उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा के जंगलों में मौनपालन (मधुमक्खी पालन) को अनुमति मिलने के बाद प्रदेश को हनी हब बनाने का संकल्प पूरा होगा। राज्य में वन क्षेत्रों के आसपास वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन शुरू होने पर यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी,बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गढ़वाल और ऋषिकेश में मधुमक्खी पालन के लिए उत्सुक संस्थाओं और युवाओं के साथ मौन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने उत्तराखंड के हनी हब ज्योली कोट का स्टडी टूर किया जिसमें ज्योलिकोट के अधिकारी, शहद उत्पादक संस्थाओं और फॉरेस्ट अधिकारियों ने मधुपालको, स्टूडेंट और महिला समूह को बी कीपिंग और शहद उत्पादन में गुणवत्ता की जानकारी दी।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु,जैव विविधता और पहाड़ी वन क्षेत्र उच्चगुणवत्ता वाले शहद उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं । यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य हुआ तो आने वाले समय में उत्तराखंड देश के प्रमुख शहद उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे ग्रामीण युवाओं,महिलाओं और स्वरोजगार से जुड़े समूह को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। जिसके लिए लगातार बी कीपिंग ट्रैनिंग प्रोग्राम को कराया जा रहा है ऋषिकेश में राजा जी टाइगर रिजर्व छेत्र के रिम छेत्र के ग्रामीण इलाकों में ट्रैनिंग प्रोग्राम कराए गए है जल्द ही ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को ट्रेंड करके एक बड़े समूह को तैयार किया जाएगा जिसमें राज्य शहद उत्पादन में अपना विशेष पहचान बनाए।
शैक्षिक कार्यक्रम में पंचगव्य आरोग्य संस्थान के डा विनोद, स्वामी नारायण आश्रम के प्रतिनिधि सहित राजकीय मौनपालन परिषद् की प्रदेश मौन पालन विशेषज्ञ श्रीमती गरिमा तिवारी , वन अधिकारी नितिन पंत.सहित ऋषिकेश ढालवाला से युवाओं ने शिरकत करी।
