देहरादून:
उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक और प्रशासनिक झटका सामने आया है। डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नंदन सिंह बिष्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि डॉ. बिष्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निजी चिकित्सक के रूप में भी सेवाएं दे रहे थे, ऐसे में उनके इस्तीफे ने स्वास्थ्य महकमे की “सब कुछ ठीक है” वाली दलीलों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि डॉ. बिष्ट ने कुछ दिन पहले अपना त्यागपत्र सौंपा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। हालांकि इस्तीफे की वजह पर आधिकारिक चुप्पी बरकरार है, लेकिन गलियारों में चर्चाओं का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
जांच, विवाद और इस्तीफा… क्या है कनेक्शन?
सूत्रों की मानें तो अस्पताल में पिछले कुछ समय से आयुष्मान योजना और मैस व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर खींचतान चल रही थी। जांच रिपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की मशीनरी में ऐसा कौन सा “वायरस” फैल गया, जिसकी वजह से जिम्मेदार अधिकारी एक-एक कर किनारा करने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी जवाबों से ज्यादा खामोशी सुनाई दे रही है। विभाग के अधिकारी फिलहाल “सब नियंत्रण में है” का इंजेक्शन लगाकर हालात सामान्य बताने की कोशिश में जुटे हैं।
सबसे बड़े अस्पताल में प्रशासनिक खालीपन
प्रदेश के सबसे व्यस्त सरकारी अस्पताल में डिप्टी एमएस जैसा महत्वपूर्ण पद खाली होना कोई मामूली बात नहीं है। रोजाना सैकड़ों मरीजों का इलाज, स्टाफ प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय जैसी जिम्मेदारियां इसी पद से जुड़ी रहती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात की जा रही है, तब प्रशासनिक व्यवस्था खुद आईसीयू में क्यों नजर आ रही है?
स्वास्थ्य विभाग की सेहत पर सवाल
दून अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का चेहरा माना जाता है। लेकिन यदि इसी संस्थान में लगातार विवाद, जांच और इस्तीफे सुर्खियां बनें, तो आम जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर मरीजों की सेहत संभालने वाला विभाग अपनी प्रशासनिक सेहत कब सुधारेगा?
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डॉ. बिष्ट के इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है और आयुष्मान योजना व मैस अनियमितताओं की जांच से आगे क्या कार्रवाई होती है। तब तक स्वास्थ्य विभाग की “फिटनेस रिपोर्ट” पर सवाल बने रहेंगे।
यह संस्करण समाचार की गंभीरता बनाए रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष करता है।
