देहरादून :
उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून द्वारा आज परिषद मुख्यालय में ष्उत्तराखण्ड में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3क् प्रिंटिंग) एवं बायो मैन्युफैक्चरिंग के परिनियोजन की संभावनाओंष् विषय पर एक उच्च स्तरीय विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिसमे इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना मंत्रालय , भारत सरकार, बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) भारत सरकार और नास्कॉम हैदराबाद के प्रतिश्ठित वैज्ञानिक,सलाहकार , राज्य के विभिन्न उद्यमियों ने सहभागिता करते हुए राज्य में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक के व्यापक उपयोग एवं संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भविष्य की एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो राज्य के औद्योगिक विकास, नवाचार एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं अन्य उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड को इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए उद्योग, अनुसंधान संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाना आवश्यक है।
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डमपजल्) के वैज्ञानिक डॉ. शंकदीप दास ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की अवधारणा, इसके वैज्ञानिक एवं औद्योगिक महत्व तथा भारत सरकार द्वारा इस क्षेत्र में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार अनुसंधान, कौशल विकास, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से इस उभरती हुई तकनीक को देशभर में प्रोत्साहित कर रही है।
3क् ळतंचील के संस्थापक डॉ. शिभु जॉन ने अपने संगठन द्वारा एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था देशभर के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योगों के साथ मिलकर अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद विकास तथा तकनीकी हस्तांतरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग से नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञ डॉ. जसप्रीत ने इस क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस तकनीक के माध्यम से अनेक सफल स्टार्टअप स्थापित किए गए हैं। उन्होंने युवाओं को नवाचार आधारित उद्यमिता अपनाने तथा अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीकों के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
डैफोडिल्स लेबोरेट्रीज के प्रबंध निदेशक एवं फार्मा एसोसिएशन उत्तराखण्ड के उपाध्यक्ष डॉ. आई.पी.एस. चावला ने उत्तराखण्ड के औषधि उद्योग के समक्ष वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक भविष्य में दवा निर्माण, कस्टमाइज्ड मेडिसिन, तीव्र प्रोटोटाइपिंग तथा उत्पादन दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रो. अरुण गिरियापुर ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3क् प्रिंटिंग) विनिर्माण क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई है। यह तकनीक उत्पादों के डिजाइन, तीव्र प्रोटोटाइपिंग, कस्टमाइज्ड निर्माण, सामग्री की बचत तथा स्थानीय स्तर पर उत्पादन को संभव बनाती है, जिससे उद्योगों की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड में उपलब्ध शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, औषधि उद्योग तथा कुशल मानव संसाधन के आधार पर राज्य एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी केन्द्र बन सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 3क् ळतंचील राज्य में तकनीकी सहयोग, कौशल विकास, उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण, संयुक्त अनुसंधान तथा स्टार्टअप संवर्धन के माध्यम से इस क्षेत्र के विकास में सक्रिय सहयोग प्रदान करेगा।
डॉ. सौमित्र पाण्डेय ने कॉस्मेटिक उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से उत्पाद विकास, पैकेजिंग डिजाइन, कस्टमाइजेशन तथा नवाचार आधारित उत्पादन प्रणालियों को नई दिशा दी जा सकती है।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों द्वारा उत्तराखण्ड में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के लिए अनुसंधान, कौशल विकास, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के अंत में यूकॉस्ट के परियोजना अधिकारी डॉ. नरेश चन्द ने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यूकॉस्ट राज्य में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के प्रसार एवं नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
