पंतनगर में 119वें अखिल भारतीय किसान मेले का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया शुभारम्भ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में 119 वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया व विश्विद्यालय साहित्य का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे लिए हर्ष का विषय है कि पंतनगर विश्वविद्यालय में 119वे कृषि मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार के मेले आयोजन कृषकों के लिए अति महत्वपूर्ण होते हैं, नवाचारों की जानकारियां मिलती है व वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर मिलता है।

पंतनगर, उत्तराखंड।

पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर में आयोजित 119वें अखिल भारतीय किसान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाना समय की आवश्यकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके। कार्यक्रम का आयोजन Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology में किया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मेले में आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, जैविक खेती और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि कृषि, बागवानी और पशुपालन के क्षेत्र में नई योजनाओं के माध्यम से किसानों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के मेले किसानों को नवीन शोध और तकनीकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। इससे किसानों को अपने अनुभव साझा करने और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे अनुसंधान और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश में कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां विकसित होने वाली तकनीकें किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगी।

मेले के दौरान किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत बीजों, जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और जल संरक्षण से जुड़ी जानकारियां भी दी जा रही हैं। विभिन्न स्टॉलों पर कृषि उपकरणों और नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसान नई विधियों को समझ सकें और अपने खेतों में उनका उपयोग कर सकें।

इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती के नए तरीकों को अपनाने की सलाह दी। उनका कहना था कि वैज्ञानिक तकनीकों और अनुसंधान आधारित खेती से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत को भी कम किया जा सकता है।

मेले में बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी देखने को मिली। यह आयोजन किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा, जहां खेती से जुड़े नए विचारों और तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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