170 दिन बाद जेल से बाहर आए सोनम वांगचुक: पत्नी बोलीं “अब खत्म हुए मेरे हर हफ्ते के जेल के चक्कर”

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नई दिल्ली/जोधपुर:

लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद Sonam Wangchuk लगभग 170 दिनों की हिरासत के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। उनकी रिहाई के बाद परिवार और समर्थकों में राहत की भावना है। इस बीच उनकी पत्नी Geetanjali J. Angmo ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब उनके “हर सप्ताह जेल जाकर मिलने के कठिन दौर” का अंत हो गया है।

वांगचुक को पिछले वर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्हें राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा उनकी हिरासत वापस लेने के निर्णय के बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई।

परिवार के लिए कठिन समय

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले कई महीनों से उनका जीवन लगातार चिंता और प्रतीक्षा में बीत रहा था।

उन्होंने कहा कि हर सप्ताह उन्हें अपने पति से मिलने के लिए जेल जाना पड़ता था। यह यात्रा न केवल लंबी और थकाऊ थी, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन थी।

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उनके अनुसार,

* पिछले छह महीनों में परिवार ने अत्यधिक भावनात्मक दबाव का सामना किया।
* वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई थी।
* अब रिहाई के बाद सबसे पहले उनकी स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि लंबे समय के बाद परिवार को राहत की सांस लेने का अवसर मिला है।

क्यों हुई थी गिरफ्तारी

Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी का संबंध लद्दाख में चल रहे आंदोलन से जोड़ा गया था। यह आंदोलन क्षेत्र की संवैधानिक और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा था।

इस आंदोलन की प्रमुख मांगें थीं:

* लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
* संविधान की छठी अनुसूची के तहत क्षेत्र को विशेष संरक्षण मिले
* स्थानीय पर्यावरण और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

इन मांगों को लेकर लद्दाख में लंबे समय से जनआंदोलन चल रहा है, जिसमें कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भाग लिया।

जेल में भी जारी रहा चिंतन और अध्ययन

रिपोर्टों के अनुसार, जेल में रहते हुए भी वांगचुक ने अपना समय अध्ययन, चिंतन और लेखन में लगाया।

बताया जाता है कि उन्होंने इस दौरान:

* पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर अध्ययन किया
* ध्यान और योग का अभ्यास किया
* प्रकृति और समाज के संबंधों पर विचार किया

यह भी कहा गया कि उन्होंने जेल में रहते हुए छोटे-छोटे जीवों के व्यवहार का अध्ययन करते हुए सामूहिकता और सहयोग के सिद्धांतों पर भी विचार किया।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

वांगचुक की गिरफ्तारी को उनकी पत्नी ने अदालत में चुनौती दी थी। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई, जिसमें उनकी हिरासत को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की गई थी।

हालांकि इस दौरान कई कानूनी प्रक्रियाएं चलती रहीं, लेकिन अंततः सरकार द्वारा हिरासत वापस लेने के निर्णय के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

कौन हैं सोनम वांगचुक

Sonam Wangchuk लद्दाख के एक प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षाविद और पर्यावरण नवप्रवर्तक हैं।

उनकी पहचान विशेष रूप से इन कार्यों के लिए है:

* लद्दाख में वैकल्पिक शिक्षा मॉडल को बढ़ावा देना
* आइस स्तूपा तकनीक के माध्यम से जल संरक्षण का अभिनव प्रयोग
* हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की वकालत

उन्हें वर्ष 2018 में प्रतिष्ठित मैगसेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

लोकप्रिय हिंदी फिल्म 3 Idiots का प्रसिद्ध किरदार “फुंसुख वांगड़ू” भी काफी हद तक उनके जीवन से प्रेरित बताया जाता है।

एक आंदोलन, जो अभी जारी है

सोनम वांगचुक की रिहाई को लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरणीय आंदोलन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी रिहाई के बाद लद्दाख में

संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर चल रही बहस और भी तेज हो सकती है।

वहीं समर्थकों का कहना है कि वांगचुक लंबे समय से हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं, और उनकी रिहाई के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ सकता है।

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