Big News: मुख्यमंत्री धामी जल्द ले सकते है नजूल भूमि फ्रीहोल्ड पर बड़ा फैसला

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सुप्रीम कोर्ट से नजूल भूमि फ्रीहोल्ड प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को स्टे किए जाने से फ्रीहोल्ड का रास्ता खुल गया है। राज्य के कई शहरों में इसका लाभ लोगों को मिलेगा। पौने चार लाख हेक्टेयर भूमि फ्रीहोल्ड हो सकेगी। 1.50 लाख के करीब लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। राज्य में अल्मोड़ा, हल्द्वानी, रुद्रपुर, रुड़की, ऋषिकेश, देहरादून समेत कई अन्य शहरों में नजूल भूमि पर लोग बसे हुए हैं। करीब पौने चार लाख हेक्टेयर भूमि पर लोग नजूल भूमि पर बसे हैं। इन लोगों की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों में लंबित फ्री होल्ड प्रकरण की फाइलें अब तेजी के साथ आगे बढ़ सकेंगी। सरकार वर्ष 2009 की नीति के अनुरूप फ्रीहोल्ड की प्रक्रिया शुरू कर सकेगी। इससे सालों से नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक मिल सकेगा।

सरकार के खाते में भी राजस्व प्राप्त होगा। विकास प्राधिकरणों, निकायों में लंबित प्रकरण तेजी के साथ  निस्तारित हो सकेंगे। लोगों को महकमों के चक्कर काटने से निजात मिल सकेगी। नजूल से जुड़े विवाद भी दूर हो सकेंगे।  वैध नजूल पट्टों के साथ ही अवैध प्रकरणों का भी निस्तारण हो सकेगा। सालों से नजूल भूमि पर बसे लोगों को राहत मिलेगी। नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक मिल सकेगा। इसके बाद उन्हें नक्शा पास कराने और बैंक लोन आदि सुविधाएं  भी मिल सकेंगी।
21 विस क्षेत्रों में असरकारी है नजूल का मुद्दा
नजूल का मुद्दा प्रदेश की 21 विधानसभा क्षेत्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। खासकर यूएसनगर जिले की राजनीति में नजूल निर्णायक साबित होता है। रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल के मुताबिक रुद्रपुर शहर की बड़ी आबादी नजूल भूमि पर बसी हुई है। स्थानीय विधायक राजकुमार ठुकराल इस मुद्दे को हर बार सदन में प्रमुखता से उठाते रहे।

ठुकराल इस प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर भी नजर बनाए हुए थे। ठुकराल के मुताबिक रुद्रपुर की 70 फीसदी आबादी नजूल पर बसी हुई है। अकेले रुद्रपुर शहर में करीब 22 हजार परिवार इससे प्रभावित हैं। उन्हेांने बताया कि उत्तराखंड के चार बड़े जिलों की 21 विधानसभा क्षेत्रों में नजूल असरकारी है।

ठुकराल खुद 2018 में नजूल कब्जाधारियों को हटाए जाने के सवाल पर इस मुद्दे का समाधान न होने तक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके थे। अब मुद्दे का समाधान निकलने पर खुशी व्यक्त करते हुए ठुकराल ने कहा कि बड़ी आबादी के सर से विस्थापन का खतरा टल गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपना वायदा पूरा कर दिया है।
एक चौथाई जमीन हो चुकी फ्री होल्ड:हल्द्वानी नगर निगम की 394.61 हेक्टेयर नजूल की जमीन पर साल-दर-साल कब्जे बढ़ते गए। विभागी की मानें तो फ्री होल्ड नीति आने के बाद करीब 100 हेक्टेयर जमीन फ्री होल्ड होकर कब्जेदारों के नाम हो गई। पिछले कुछ सालों से फ्री होल्ड पर रोक लगी हुई है।
आवेदन की तिथि का सर्किल रेट चुकाना होगा
नजूल नीति 2009 में नजूल फ्री होल्ड के लिए आवेदन की तिथि का सर्किल रेट लागू किया गया है। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने नजूल आबंटन के लिए आवेदन किया हुआ है। अब सुप्रीम से अनुमति मिलने के बाद ऐसे लोग 2009 के सर्किल रेट के अनुसार जमीन का मूल्य चुका सकेंगे। वर्तमान सर्किल रेट के लिहाज से यह एक बड़ी राहत है।

तीन दशक से नहीं हुआ सर्वे
हल्द्वानी नगर निगम के अभिलेखों में 78 हेक्टेयर नजूल भूमि पर कृषि दर्शाई गई है, लेकिन असल में ऐसा न के बराबर ही है। तीन दशक से अधिक समय से जमीन का सर्वे, सेटलमेंट न हो पाने से इसकी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। नजूल भूमि पर रहने वाले लोगों को मालिकाना हक मिलने के बाद कई तरह के फायदे होंगे।

 

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