मुंबई :
महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाले बारामती विमान हादसे की जांच अब नए चरण में प्रवेश करने जा रही है। 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए विमान क्रैश में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच के बाद अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है।
पहले कौन कर रहा था जांच?
हादसे के तुरंत बाद जांच की जिम्मेदारी Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) और Directorate General of Civil Aviation (DGCA) की टीमों को सौंपी गई थी। तकनीकी पहलुओं—जैसे इंजन फेलियर, मौसम की स्थिति और लैंडिंग प्रोटोकॉल—की बारीकी से जांच की जा रही थी।
इसके अलावा महाराष्ट्र सीआईडी की यूनिट ने भी स्वतंत्र रूप से केस की जांच शुरू की थी।
सीबीआई जांच की मांग क्यों उठी?
अजित पवार के निधन के बाद उनके परिवार और पार्टी नेताओं ने मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग उठाई। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, बेटे जय पवार और पार्थ पवार समेत एनसीपी के कई नेताओं ने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने रविवार को घोषणा की कि मामले की जांच अब सीबीआई को सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से भी चर्चा की है।
फडणवीस ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाली घटना” बताते हुए कहा कि जनता और राजनीतिक वर्ग दोनों जानना चाहते हैं कि हादसे की असली वजह क्या थी।
‘साजिश’ का आरोप और उठते सवाल
हादसे को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। अजित पवार के भतीजे और कर्जत-जामखेड़ से एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक Rohit Pawar ने इस घटना को साजिश करार दिया है।
रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई गंभीर आरोप लगाए थे :
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विमान का इंजन पहले से खराब था।
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सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।
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जरूरत से ज्यादा ईंधन भरा गया था।
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मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद उड़ान की अनुमति दी गई।
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बारामती में लैंडिंग के समय दृश्यता बेहद कम थी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब अजित पवार को Z-लेवल सुरक्षा प्राप्त थी, तो विमान यात्रा से पहले सुरक्षा और तकनीकी जांच में लापरवाही कैसे हुई?
अब जब मामला सीबीआई के पास जाएगा, तो जांच का दायरा केवल तकनीकी कारणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संभावित आपराधिक एंगल और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की भी जांच होगी।
राजनीतिक हलकों में यह केस आने वाले समय में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर है कि क्या यह महज एक तकनीकी हादसा था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।
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