चैट जीपीटी और ओटीपी ने बदल दिए हैं अभिव्यक्ति के अर्थ

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सूचना संप्रेषण की इस नई दुनिया में इन दिनों जब सब कुछ बदल रहा है तो हमारा जीवन किस तरह से विज्ञान की इस तकनीक से प्रभावित हो रहा है । वह अब हमारे सामने है ।

इन दिनों जिस परिवेश में हम रह रहे हैं तथा जिस प्रवेश में हम जीने की चेष्टा कर रहे हैं वह एक तकनीक का कमाल है  तथा तकनीक का ऐसा जज्बा है जिसने सारी की सारी दुनिया को वैश्विक परिदृश्य तथा उसकी अपनी सीमाओं से परे दुनिया को इंसटेंट स्तर पर अर्थात संजाल के उस ग्रुप में बदल दिया है जो संजाल पहले सिर्फ इंटरनेट तक सीमित था। इन दिनों अब इंटरनेट की दुनिया में जो सबसे बड़ी तब्दीली तथा आश्चर्य आश्चर्य चकित करने वाली सूचना है तथा जिसका प्रयोग पूरी दुनिया में होने लगा है बस बेहद अद्भुत और त्वरित गति का संप्रेषण है, चैट जीपीटी अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दस्तक, हालांकि कुछ देशों में विरोध के स्वर भी हैं तथा इसके खिलाफ कानून भी बन रहे हैं क्योंकि आभासी दुनिया की नई सूचना प्रयोग की  तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस था।

 इस समय ए आई (AI) इस तरह से जीवन प्रभावित करने लगी है कि अब चैट जीपीटी हमारे जीवन को हमेशा के लिए इस तरह से बदल देगा कि आप विश्वास ही नहीं कर सकते । आपके हाथों में पकड़ा हुआ माउस किस तरह की जानकारियां आपको देता है। इन दिनों वह आपके मन मस्तिष्क के साथ आपके ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बना रहा है ।  इसी के साथ दूसरी तरफ ओटीटी का प्लेटफार्म है जिसने पूरी की पूरी दुनिया के अर्थ ही बदल दिए हैं।अब आप सिर्फ और सिर्फ टेलीविजन नहीं आपुति अब आप फेसबुक से लेकर ओटीटी वर्ल्ड वाइड वेब सीरीज के इतने आदी हो चुके हैं कि अब दुनिया में आप जिस समय जो देखना चाहो वह आपके मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन पर उपलब्ध है।

यह हमारी आज की दुनिया है और यही इस दुनिया का वर्तमान का यथार्थ भरा एक ऐसा सच है जिसको देखने की हिम्मत ही नहीं है  । इन दिनों जिसको हम सब अपना चुके हैं । अब इसमें आयु वर्ग का सर्वेक्षण कुछ भी नहीं है इसमें बचपन से लेकर अंत समय तक अपना समय काट रहे बुजुर्ग भी इन संजाल की नई दुनिया के आदी हो चुके हैं और सचमुच जेट जीपीटी किस तरह से आप की दुनिया बदल रही है वह और भी अद्भुत है ।

आपकी अभिव्यक्ति के अर्थ इन दिनों बदल चुके हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक आई जिस तरह का समय  अर्थात जिस तरह की जानकारियां आपको दे रही है उससे भी सजग होकर उसको देखना समझना तथा उसको अपने व्यवहार में लाने की भी एक कला तथा उसका भी एक तजुर्बा होना चाहिए ।

पिछले दिनों न्यूयॉर्क टाइम्स में फरहाद मंजू की एक रिपोर्ट जो हमारे सामने आई है उसके कुछ ही से मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूं।वह कहते हैं कि एक बार चैट जीपीटी का इस्तेमाल शुरू करने के बाद फिर आप एक जगह रुक नहीं सकते । आप छोटी मोटी बातों से शुरू करते हैं फिर मैथ की स्पेलिंग हल कर दे जा मुझे भरोसे बनाई जा सकने वाली किसी भी वेजिटेरियन के बारे में बताएं यह सब कुछ बताते हुए आगे इसकी दूसरी संभावना बताते हैं ।

इस पर फरहाद मंजू के अनुसार अब जानने का समय हो गया है कि आप की संभावनाओं से भरे इस जीवन में कौन सा भी हो रहा है अब आप उसके बारे में भिन्न तरह से सोचने लगते हैं ।‌उसे आप करतब दिखाने वाले किसी चीज की बजाय काम में आने वाले उपायों की तरफ देखने लगते हैं आप पाते हैं कि बड़ी से बड़ी और छोटी छोटी चीजों के लिए भी आप उसी के पास जा रहे हैं ।‌

ऐसा नहीं है चैट जीपीटी कभी ना काम भी नहीं होता लेकिन वह आपके लिए इतना मददगार जरूर साबित होने लगा है कि आप सोचने लगे हैं कि जल्दी ही इस तरह के बहुत दूसरे लोग भी इस पर नोट इस पर निर्भर होते चले जाएंगे ।

एक अन्य रिपोर्ट में वो आगे कहते हैं कि गूगल सर्च से आगे के साथ यह तमाम टेक्नोलॉजी नयी है हालांकि इसमें से किसी ने भी मेरे जीवन को रातों-रात नहीं बदला । अब यह अधिक लोगों के लिए यह प्रयोगी साबित हो रहा है। यह देखना बहुत रोचक है कि जब एपल के द्वारा आईफोन लॉन्च करने के 5 साल बाद ऐसा लगने लगा मानो दुनिया की हर चीज का एक ऐप मौजूद है ।  अपन तो लगभग आधे हम भी क्यों के पास स्मार्टफोन थे अपने 5 साल और तीन चौथाई के पास अब किसी चीज के बारे में सोचना मुश्किल हो रहा है । स्मार्टफोन बदलाव चैट जीपीटी इतनी ही बड़ी टेक्नोलॉजी है उस को अभी कुछ ही महीने हुए हैं ।यह अभी कंप्लीट नहीं हुई है और ओपन ए आई द्वारा शुरू गई कई महीनों की रिसर्च प्रमुख यह बताती है कि डॉक्टर सॉफ्टवेयर इंजीनियर उपन्यासकार घरेलू कामकाज करने वाले अभिभावक  लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आई पर निर्भर होने लगे हैं ।

इन दिनों यह अब सच है और मीडिया इंडस्ट्री का काम भी इससे बदल सकता है लेकिन यह काम तथा पत्रकारों के काम एआई (AI) से अर्थात चैट जीपीटी से बदलने लगे हैं ।‌ वह जो पत्रकारिता और समाचार संकलन की प्रतिक्रिया के समक्ष प्रस्तुत होते थे अब पत्रकार ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं और उनके हाथों में जादू की छड़ी है और आगे ठीक जाती है । यह भी स्पष्ट नहीं है लेकिन हमें उसका प्रयोग करते समय ठीक से काम करने की क्षमता रखती है।

 

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